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गुरु गम आतम चीन्हा भजन lyrics

भजन

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धन सुखरामजी महाराज की वाणी गुरु गम आतम चीन्हा भजन lyrics

अब हम गुरु गम आतम चीन्हा
आवण जावण रा भय नहीं जिणरै एके निश्चय कीन्हा।।टेर।।

(1) जोग लिया जद सुख-दुख त्यागिया राम नाम रंग भीना।
घट घट में सत साहेब बोले वो साहेब लिख लीन्हा।।

(2) भैख फकीरी सब कोई लेवे योग फकीर पद झीणा।
जिनके बाण लागा सतगुरु का शीश काट धर दिना।।

(3) फेरी नहीं फिरू मांग नहीं खाऊं निर्भय होए पद लीन्हा।
अजगर इधर-उधर नहीं डोले चूण हरीजी ने दीना।।

(4) मरजीवा होए जगत में विसरू सवाल करूं नहीं कीना।
जिनकी कला सकल में वरते वो साहेब लख लीना।।

(5) भक्ति रा नैण ज्ञान ज्यारा दर्पण रवि वैराग मिल तीना।
धन सुखरामजी के आतम दरसे लिखें संत प्रवीणा।।

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यह गुरु गम आतम चीन्हा भजन lyrics धन सुखराम जी महाराज द्वारा रचित उत्तम भक्ति चरित्र का वर्णन किया है जब तक हम सत्य भक्ति नहीं करेंगे तब तक भक्ति का दिखावा आडंबर करने सेधन सुखराम जी महाराज द्वारा रचित उत्तम भक्ति चरित्र का वर्णन किया है जब तक हम सत्य भक्ति नहीं करेंगे तब तक भक्ति का दिखावा आडंबर करने से हमें वह भक्ति के गुण लाभ प्राप्त नहीं होंगे संत सुखराम जी महाराज ने कहा कि जिस दिन परमात्मा के नाम का योग पथ भक्ति मार्ग पर पैर रखा उस दिन हमने सुख और दुख को समान जानकर त्याग दिया और परमात्मा के नाम राम नाम का रंग अपने ऊपर चढ़ा दिया जिन महापुरुषों को सतगुरु के शब्द बाणों का शब्द बाण लगे हैं और उनको पता लगा है उन्होंने अपना शीश काटकर के सच्चे सद्गुरु के चरणो में रख दिया जिन्होंने गुरु की गम को जाना उन्होंने आतम ज्ञान को जान लिया गुरु गम आतम चीन्हा भजन lyrics

धन सुखरामजी महाराज कहना चाहते हैं कि संसार में देखा सेखी झूठ एक फकीरी लेते हैं उनसे परमात्मा राजी नहीं होते परमात्मा तो तभी राजी होंगे जब आप की भक्ति में सत्यता होगी और आप सत भक्ति धारण करेंगे यह भैख फकीरी तो हर कोई ले लेता है ऊपर भगवा बाना पहन लिया यह हो गई भैख फकीरी है लेकिन मुक्ति की विधि मुक्ति का ज्ञान सच्चे सतगुरु की पहचान अगर नहीं हुई है तो यह भैख लिया हुआ क्या काम आया और जो परमपिता परमात्मा सब घट व्यापक है जिनकी कला सकल में चल रही है हमने तो उन परमात्मा को उन वासुदेव को धारण कर रखा है हमने तो जो सर्व घट व्यापक परमात्मा है उनको लिख लिया है अंतरात्मा में मान लिया है गुरु गम आतम चीन्हा भजन lyrics

ना फेरी फिरु नहीं मांग कर खाऊंगा जिस परमपिता परमात्मा ने पैदा किया है वह अपने आप ही मेरा पालन पोषण करेगा क्योंकि अजगर जो जल में रहती है उसके लिए भी परमात्मा खाने की व्यवस्था कर रहे हैं देते हैं जो कोई काम नहीं करती तो फिर मेरा पालन पोषण कैसे नहीं करेगा परमात्मा इस नाशवान संसार में किसी भी प्रकार की इच्छा ना करते हुए मरजीवा होकर संसार में विचरण करना किसी से भी शिकवा गिला नहीं करना सवाल जवाब नहीं करना क्योंकि जिन परमात्मा की कला सकल संसार में व्याप्त है फिर सवाल जवाब के साथ इस प्रकार धन सुखराम जी महाराज कह रहे हैं कि भक्ति की नजर से और ज्ञान रूपी दर्पण आईने में सूर्य जैसा तीव्र तेज वैराग्य संसार से पूर्ण मुक्ति की इच्छा हो सुखराम जी महाराज कह रहे हैं यह सब तो कोई चतुर भक्त प्रवीण भक्ति धारण कर सकता है लिख सकता है उम्मीद करता हूं मित्रों यह भजन आपको पसंद आया होगा अगर वजन पसंद आया है तो कृपया लाइक करें अपना अमूल्य सुझाव हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर दें साथ ही साथ अपने प्रिय मित्रों में शेयर जरूर करें गुरु गम आतम चीन्हा भजन lyrics

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राजिया रा सौरठा

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